तसव्वुर मैं उनका कुछ यूँ मिज़ाज होता है
जिस्म दूर हो कितना भी,दिल करीब होता है
महेक जाती है रातें अक्सर ख्वाबों से उसके
जब वो तस्वीर से निकल मेरे करीब होता है
झुकती आँखों से बयां करती है वो मयकशी
मेरे खामोश लबों से इश्क कहाँ बयां होता है
Sanjay Kanojiya
Sanjay Kanojiya
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